श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.35.20 
युधिष्ठिर उवाच
भिन्ध्यनीकं युधां श्रेष्ठ द्वारं संजनयस्व न:।
वयं त्वानुगमिष्यामो येन त्वं तात यास्यसि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे वीर योद्धाओं! इस सेना को तोड़कर हमारे लिए एक द्वार बनाओ! पिताश्री! फिर हम भी आपके पीछे उसी मार्ग पर चलेंगे जिस पर आप चलेंगे।"
 
Yudhishthira said, "O bravest of warriors! Break the formation and make a door for us! Father! Then we will follow you on the same path you will take."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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