श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.35.19 
उपदिष्टो हि मे पित्रा योगोऽनीकविशातने।
नोत्सहे हि विनिर्गन्तुमहं कस्यांचिदापदि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पिता ने मुझे चक्रव्यूह भेदने की विधि बताई है, परंतु यदि मैं किसी संकट में पड़ जाऊँ, तो उस संरचना से बाहर नहीं निकल पाता हूँ॥19॥
 
Father has told me the method to break through the Chakravyuh (whirlpool of thread), but if I get into some trouble, I am unable to get out of that formation.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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