| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा » श्लोक 18 |
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| | | | श्लोक 7.35.18  | अभिमन्युरुवाच
द्रोणस्य दृढमत्युग्रमनीकप्रवरं युधि।
पितॄणां जयमाकाङ्क्षन्नवगाहेऽविलम्बितम्॥ १८॥ | | | | | | अनुवाद | | अभिमन्यु ने कहा, 'महाराज! मैं अपने पूर्वजों की विजय की इच्छा से द्रोणाचार्य की अत्यंत भयंकर, बलवान एवं श्रेष्ठ सेना के मध्य शीघ्रतापूर्वक युद्धभूमि में प्रवेश कर रहा हूँ। | | | | Abhimanyu said, 'Maharaj! With the desire of securing victory for my forefathers, I am quickly entering the battlefield among the extremely fearsome, strong and excellent army of Dronacharya. | | ✨ ai-generated | | |
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