श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 35: युधिष्ठिर और अभिमन्युका संवाद तथा व्यूहभेदनके लिये अभिमन्युकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.35.14 
एत्य नो नार्जुनो गर्हेद् यथा तात तथा कुरु।
चक्रव्यूहस्य न वयं विद्मो भेदं कथंचन॥ १४॥
 
 
अनुवाद
पिताजी! हमारी ऐसी निन्दा न करें (हमें अयोग्य न कहें) कि अर्जुन संशप्तकों से युद्ध करके लौट आए। हम चक्रव्यूह भेदने की विधि किसी भी प्रकार नहीं जानते।'
 
‘Father! Do not criticize us (do not call us incapable) in such a way that Arjuna returns from the war with the Samshaptakas. We do not know the process of breaking the Chakravyuh in any way.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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