श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.33.8 
इच्छतस्ते न मुच्येत चक्षु:प्राप्तो रणे रिपु:।
जिघृक्षतो रक्ष्यमाण: सामरैरपि पाण्डवै:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि युद्धभूमि में कोई शत्रु तुम्हारी आँखों के सामने आ जाए और तुम उसे पकड़ना चाहो, तो चाहे समस्त देवताओं सहित समस्त पाण्डव भी उसकी रक्षा करें, तो भी वह निश्चय ही तुमसे बच नहीं सकेगा॥8॥
 
If any enemy appears before your eyes on the battlefield and you wish to capture him, then even if all the Pandavas along with all the Gods are protecting him, he will certainly not be able to escape from you. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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