श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.33.22 
धृतराष्ट्र उवाच
पुत्रं पुरुषसिंहस्य संजयाप्राप्तयौवनम्।
रणे विनिहतं श्रुत्वा भृशं मे दीर्यते मन:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले- संजय! सिंह-पुरुष अर्जुन का वह पुत्र अभी युवावस्था में भी नहीं पहुँचा था। युद्ध में उसके मारे जाने का समाचार सुनकर मेरा हृदय अत्यंत व्यथित हो गया है।
 
Dhritarashtra said— Sanjay! That son of the lion-man Arjuna had not even reached his youth. My heart is extremely broken on hearing that he was killed in the war.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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