| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 33: दुर्योधनका उपालम्भ, द्रोणाचार्यकी प्रतिज्ञा और अभिमन्युवधके वृत्तान्तका संक्षेपसे वर्णन » श्लोक 11 |
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| | | | श्लोक 7.33.11  | ससुरासुरगन्धर्वा: सयक्षोरगराक्षसा:।
नालं लोका रणे जेतुं पाल्यमानं किरीटिना॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | परंतु एक बात स्मरण रखो, जिसकी रक्षा किरीटधारी अर्जुन युद्धभूमि में कर रहे हैं, उसे देवता, दानव, गन्धर्व, यक्ष, नाग और राक्षसों सहित सम्पूर्ण जगत भी नहीं हरा सकता॥ 11॥ | | | | But remember one thing, the one whom crown-wearing Arjuna is protecting on the battlefield, cannot be defeated even by the gods, demons, Gandharvas, Yakshas, serpents and the entire world including demons.॥ 11॥ | | ✨ ai-generated | | |
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