श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  7.32.78 
तथा परैर्बहुकरणैर्वरायुधै-
र्हता गता: प्रतिभयदर्शना: क्षितिम्।
विपोथिता हयगजपादताडिता
भृशाकुला रथमुखनेमिभि: क्षता:॥ ७८॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं के पास अनेक साधन थे। उनके हाथों में उत्तम अस्त्र-शस्त्र थे। उनके द्वारा मारे जाने पर भूमि पर पड़े हुए सैनिक बड़े डरावने लग रहे थे। हाथी-घोड़ों के पैरों से चोट खाकर अनेक योद्धा भूमि पर गिर पड़े थे। बड़े-बड़े रथों के पहियों से कुचलकर अनेक घायल और क्षत-विक्षत होकर अत्यंत व्यथित हो रहे थे। 78।
 
The enemies had many resources. They had excellent weapons in their hands. The soldiers lying on the ground after being killed by them looked very scary. Many warriors fell on the ground after being hurt by the feet of elephants and horses. Many were getting injured and mutilated after being crushed by the wheels of big chariots and were becoming very distressed. 78.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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