श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  7.32.75 
एवं सुकलिलं युद्धमासीत् क्रव्यादहर्षणम्।
महद्भिस्तैरभीतानां यमराष्ट्रविवर्धनम्॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वे निर्भय सैनिक अपने बलवान विरोधियों के साथ भयंकर युद्ध कर रहे थे, जिससे कच्चा मांस खाने वाले पशु-पक्षियों तथा भूत-प्रेतों का भी आनन्द बढ़ गया और यमराज के राज्य में भी समृद्धि आ गई।
 
Thus, those fearless soldiers were fighting a fierce battle with their powerful opponents, which increased the joy of the animals and birds who eat raw meat and also the ghosts and brought prosperity to the kingdom of Yamaraja. 75 1/2
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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