श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 72-73h
 
 
श्लोक  7.32.72-73h 
एवमेष महारौद्र: क्षयार्थं सर्वधन्विनाम्॥ ७२॥
तावकानां परेषां च त्यक्त्वा प्राणानभूद् रण:।
 
 
अनुवाद
महाराज! इस प्रकार आपके तथा शत्रु के समस्त धनुर्धरों का नाश करने के उद्देश्य से एक-दूसरे के प्राणों की परवाह न करते हुए उन दोनों में भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया।
 
Maharaj! In this way, with the aim of destroying all your and the enemy's archers, a fierce battle began between them without caring for each other's lives. 72 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)