vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम
»
श्लोक 65-66h
श्लोक
7.32.65-66h
धृष्टद्युम्नोऽप्यसिवरं चर्म चादाय भास्वरम्॥ ६५॥
जघान चन्द्रवर्माणं बृहत्क्षत्रं च नैषधम्।
अनुवाद
धृष्टद्युम्न ने भी उत्तम तलवार और चमकती ढाल से चन्द्रवर्मा और निषादराज बृहत्क्षत्र का काम तमाम कर दिया ॥65 1/2॥
Dhrishtadyumna also finished the work of Chandravarma and Nishadha king Brihatkshatra with the best sword and shining shield. 65 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×