श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 65-66h
 
 
श्लोक  7.32.65-66h 
धृष्टद्युम्नोऽप्यसिवरं चर्म चादाय भास्वरम्॥ ६५॥
जघान चन्द्रवर्माणं बृहत्क्षत्रं च नैषधम्।
 
 
अनुवाद
धृष्टद्युम्न ने भी उत्तम तलवार और चमकती ढाल से चन्द्रवर्मा और निषादराज बृहत्क्षत्र का काम तमाम कर दिया ॥65 1/2॥
 
Dhrishtadyumna also finished the work of Chandravarma and Nishadha king Brihatkshatra with the best sword and shining shield. 65 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)