श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  7.32.58-59h 
ता भुजाग्रैर्महावेगा निसृष्टा भुजगोपमा:॥ ५८॥
दीप्यमाना महाशक्त्यो जग्मुराधिरथिं प्रति।
 
 
अनुवाद
उसके हाथों से छूटकर वे अत्यन्त वेगवान सर्पाकार महाशक्तियाँ अपनी प्रभा से प्रकाशित होती हुई कर्ण की ओर बढ़ीं ॥58 1/2॥
 
Released from his hands, those extremely swift serpentine mighty powers moved towards Karna, radiating with their radiance. ॥ 58 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)