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mahabharat 7.32.48-49h: कुछ तो विलाप करने लगे, कुछ नष्ट हो गए, कुछ अर्जुन के बाणों से घायल होकर भूमि पर गिर पड़े। 48 1/2   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 48-49h
 
 
श्लोक  7.32.48-49h 
केचिदार्तस्वनं चक्रुर्विनेशुरपरे पुन:॥ ४८॥
पार्थबाणहता: केचिन्निपेतुर्विगतासव:।
 
 
अनुवाद
कुछ तो विलाप करने लगे, कुछ नष्ट हो गए, कुछ अर्जुन के बाणों से घायल होकर भूमि पर गिर पड़े। 48 1/2
 
Some started wailing, some got destroyed, some were hit by Arjun's arrows and fell lifeless on the ground. 48 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)