श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  7.32.44-45h 
तस्य कीर्तिमतो लक्ष्म सूर्यप्रतिमतेजस:॥ ४४॥
दीप्यमानमपश्याम तेजसा वानरध्वजम्।
 
 
अनुवाद
हमने दूर से ही अर्जुन का प्रतीक वानर ध्वज देखा, जो सूर्य के समान तेजस्वी और यशस्वी था और अपनी दिव्य महिमा से प्रकाशित हो रहा था। 44 1/2॥
 
We saw from a distance the monkey flag, which was the symbol of Arjuna, as bright and famous as the sun, which was shining with its divine glory. 44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)