श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  7.32.41-42h 
तस्य ज्यातलनिर्घोष: शुश्रुवे दिक्षु मारिष॥ ४१॥
वज्रसंह्रादसंकाशस्त्रासयन् मानवान् बहून्।
 
 
अनुवाद
आर्य! उसके धनुष की टंकार की गम्भीर ध्वनि चारों ओर सुनाई दे रही थी। वह गड़गड़ाहट जैसी तीव्र ध्वनि अनेक लोगों को भयभीत कर रही थी।
 
Arya! The deep sound of the string of his bow could be heard in all directions. That loud sound, like the roar of thunder, was frightening many people. 41 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)