श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 39-40h
 
 
श्लोक  7.32.39-40h 
ते त्वार्यधर्मसंरब्धा दुर्निवारा दुरासदा:॥ ३९॥
शरार्ता न जहुर्द्रोणं पञ्चाला: पाण्डवै: सह।
 
 
अनुवाद
वे पाण्डव और पांचाल योद्धा आर्यधर्म के अनुसार विजय के लिए प्रयत्नशील थे। उन्हें रोकना या पराजित करना अत्यन्त कठिन था। बाणों से घायल होने पर भी वे द्रोणाचार्य को छोड़ नहीं सकते थे।
 
Those Pandavas and the Panchala warriors were striving for victory according to the Aryadharma. It was very difficult to stop or defeat them. Even after being hit by arrows, they could not leave Dronacharya. 39 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)