श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.32.3 
आनन्तर्यमभिप्रेप्सु: षड्‍‍विंशत्या समार्पयत्।
कर्णो द्वादशभिर्बाणैरश्वत्थामा च सप्तभि:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
इस आक्रमण-प्रतिघात को निरन्तर जारी रखने की इच्छा से द्रोणाचार्य ने भीमसेन पर छब्बीस, कर्ण पर बारह और अश्वत्थामा पर सात बाण छोड़े॥3॥
 
Wanting to continue this attack-retaliation continuously, Dronacharya shot twenty-six arrows at Bhimsen, twelve arrows at Karna and seven arrows at Ashwatthama. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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