श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  7.32.24-25h 
हा तात हा पुत्र सखे क्वासि तिष्ठ क्व धावसि।
प्रहराहर जह्येनं स्मितक्ष्वेडितगर्जितै:॥ २४॥
इत्येवमुच्चरन्ति स्म श्रूयन्ते विविधा गिर:।
 
 
अनुवाद
उस समय सभी सैनिक ऐसी बातें कह रहे थे, "अरे बाप रे! अरे बेटा रे! मित्रों! तुम कहाँ हो? रुको, कहाँ भाग रहे हो? इसे मारो, लाओ, मार डालो।" हँसी, उछल-कूद और दहाड़ के साथ-साथ उनके मुँह से तरह-तरह की बातें निकल रही थीं।
 
At that time all the soldiers were saying things like, "Oh my father! Oh my son! Friends! Where are you? Stop, where are you running? Beat him, bring him, kill him." Along with laughter, jumping and roaring, various kinds of words could be heard coming from their mouths. 24 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)