श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  7.32.21-22h 
सासिर्बाहुर्निपतित: शिरश्छिन्नं सकुण्डलम्॥ २१॥
गजेनाक्षिप्य बलिना रथ: संचूर्णित: क्षितौ।
 
 
अनुवाद
कई वीरों की भुजाएँ तलवारों से काट दी गईं, कई के कुंडलों से सुसज्जित सिर धड़ से अलग कर दिए गए। कहीं किसी बलवान हाथी ने रथ को उठाकर नीचे फेंक दिया, जिससे वह भूमि पर गिरकर टुकड़े-टुकड़े हो गया।
 
Many brave men's arms were chopped off with swords, many their earring-adorned heads were cut off from their bodies. Somewhere a strong elephant lifted the chariot and threw it down and it fell to the ground and broke into pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)