श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.32.19-20h 
हन्ति स्मात्र पिता पुत्रं रथेनाभ्येत्य संयुगे॥ १९॥
पुत्रश्च पितरं मोहान्निर्मर्यादमवर्तत।
 
 
अनुवाद
वहाँ पिता रथ पर चढ़कर युद्धभूमि में आता और अपने पुत्र को मार डालता, और पुत्र भी मोहवश पिता को मार डालता। इस प्रकार वहाँ मर्यादाहीन युद्ध चल रहा था॥19 1/2॥
 
There the father would come to the battlefield on a chariot and kill his son, and the son too, out of attachment, would kill his father. Thus, a war without any decorum was going on there.॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)