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mahabharat 7.32.1: संजय कहते हैं - महाराज! भीमसेन अपनी सेना का विनाश सहन नहीं कर सके। उन्होंने गुरुदेव को साठ बाणों से और कर्ण को दस बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 32: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध,भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.32.1 
संजय उवाच
प्रतिघातं तु सैन्यस्य नामृष्यत वृकोदर:।
सोऽभ्याहनद् गुरुं षष्टॺा कर्णं च दशभि: शरै:॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज! भीमसेन अपनी सेना का विनाश सहन नहीं कर सके। उन्होंने गुरुदेव को साठ बाणों से और कर्ण को दस बाणों से घायल कर दिया।
 
Sanjaya says - Maharaj! Bhimsena could not bear the destruction of his army. He injured Gurudev with sixty arrows and Karna with ten arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)