श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 31: कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध तथा अश्वत्थामाके द्वारा राजा नीलका वध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.31.1 
धृतराष्ट्र उवाच
तेष्वनीकेषु भग्नेषु पाण्डुपुत्रेण संजय।
चलितानां द्रुतानां च कथमासीन्मनो हि व:॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! जब पाण्डुपुत्र अर्जुन से पराजित होकर सारी सेनाएँ भाग गईं, तब व्याकुल होकर भागते समय तुम्हारे मन की क्या स्थिति थी?॥1॥
 
Dhritarashtra asked - Sanjaya! When all the armies fled after being defeated by Pandu's son Arjun, what was the state of your mind while you were fleeing in distraught state?॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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