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mahabharat 7.30.37: अर्जुन के आक्रमण से आपके सैनिक बहुत पीड़ित हो रहे थे। उनमें से बहुत से सैनिक इधर-उधर भागते हुए अपने ही पक्ष के योद्धाओं को मार रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.30: अर्जुनके द्वारा वृषक और अचलका वध, शकुनिकी माया और उसकी पराजय तथा कौरव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.30.37 
ते हन्यमाना: पार्थेन त्वदीया व्यथिता भृशम्।
स्वानेव बहवो जघ्नुर्विद्रवन्तस्ततस्तत:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के आक्रमण से आपके सैनिक बहुत पीड़ित हो रहे थे। उनमें से बहुत से सैनिक इधर-उधर भागते हुए अपने ही पक्ष के योद्धाओं को मार रहे थे।
 
Your soldiers were suffering a lot after being attacked by Arjun. Many of them, while running here and there, killed warriors of their own side. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)