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mahabharat 7.24.14: जो मनुष्य धर्म को त्यागकर स्वार्थी हो जाता है, वह इस संसार से (सांसारिक स्वार्थ से) भ्रष्ट हो जाता है और नीच गति को प्राप्त होता है ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 7.24: धृतराष्ट्रका अपना खेद प्रकाशित करते हुए युद्धके समाचार पूछना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 24: धृतराष्ट्रका अपना खेद प्रकाशित करते हुए युद्धके समाचार पूछना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.24.14 
यो हि धर्मं परित्यज्य भवत्यर्थपरो नर:।
सोऽस्माच्च हीयते लोकात् क्षुद्रभावं च गच्छति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य धर्म को त्यागकर स्वार्थी हो जाता है, वह इस संसार से (सांसारिक स्वार्थ से) भ्रष्ट हो जाता है और नीच गति को प्राप्त होता है ॥14॥
 
A man who abandons Dharma and becomes selfish, is corrupted from this world (from worldly selfishness) and attains a low state. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)