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mahabharat 7.23.63: जो मनुष्यों में सबसे अधिक पराक्रमी राजा कहा जाता है, जो चोरों और लुटेरों का नाश करता है, उस समुद्रप्रत्यंतर के राजा को तोते के रंग के घोड़ों द्वारा युद्धभूमि में ले जाया गया।   |   mahabharat अध्याय 7.23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.23.63 
यं तु सर्वमनुष्येभ्य: प्राहु: शूरतरं नृपम्।
तं पटच्चरहन्तारं शुकवर्णाऽवहन् हया:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्यों में सबसे अधिक पराक्रमी राजा कहा जाता है, जो चोरों और लुटेरों का नाश करता है, उस समुद्रप्रत्यंतर के राजा को तोते के रंग के घोड़ों द्वारा युद्धभूमि में ले जाया गया।
 
He who is called the most valiant king of all men, who destroys thieves and robbers, that ruler of the Samudra Pratyatra was led to the battlefield by horses of parrot-colour. 63.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)