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mahabharat 7.23.3: सारंग के समान रंग (श्वेत, नीला और लाल) के घोड़ों के साथ युधमन्यु स्वयं अपने घोड़ों को तेजी से द्रोणाचार्य के रथ की ओर दौड़ा रहे थे। वह अजेय वीर क्रोध से भर गया।   |   mahabharat अध्याय 7.23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 23: पाण्डव-सेनाके महारथियोंके रथ, घोड़े, ध्वज तथा धनुषोंका विवरण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.23.3 
सारङ्गाश्वो युधामन्यु: स्वयं प्रत्वरयन् हयान्।
पर्यवर्तत दुर्धर्ष: क्रुद्धो द्रोणरथं प्रति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सारंग के समान रंग (श्वेत, नीला और लाल) के घोड़ों के साथ युधमन्यु स्वयं अपने घोड़ों को तेजी से द्रोणाचार्य के रथ की ओर दौड़ा रहे थे। वह अजेय वीर क्रोध से भर गया।
 
Accompanied by horses of the same colour as the Saranga (white, blue and red), Yudhmanyu himself drove his horses swiftly back towards the chariot of Dronacharya. That invincible hero was filled with anger.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)