श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद  »  श्लोक 7-9
 
 
श्लोक  7.22.7-9 
संजय उवाच
तान् दृष्ट्वा चलितान् संख्ये प्रणुन्नान् द्रोणसायकै:।
पञ्चालान् पाण्डवान् मत्स्यान् सृञ्जयांश्चेदिकेकयान्॥ ७॥
द्रोणचापविमुक्तेन शरौघेणाशुहारिणा।
सिन्धोरिव महौघेन ह्रियमाणान् यथा प्लवान्॥ ८॥
कौरवा: सिंहनादेन नानावाद्यस्वनेन च।
रथद्विपनरांश्चैव सर्वत: समवारयन्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा—हे राजन! कौरवों ने देखा कि युद्ध में द्रोणाचार्य के बाणों से पांचाल, पाण्डव, मत्स्य, संजय, चेदि और केकय योद्धा व्याकुल हो रहे हैं और जैसे समुद्र का विशाल जल अनेक नौकाओं को बहा ले जाता है, उसी प्रकार द्रोणाचार्य के धनुष से छूटे हुए बाणों के समूह ने शीघ्र ही प्राण हरण करके पाण्डव सैनिकों को मार डाला है। तब वे सिंहों के समान गर्जना करते हुए तथा नाना प्रकार के युद्ध-यंत्रों की गम्भीर ध्वनि करते हुए शत्रुओं के सारथि, हाथीसवार और पैदल सैनिकों को सब ओर से रोकने लगे।
 
Sanjaya said—O King! The Kauravas saw that the Panchala, Pandava, Matsya, Sanjaya, Chedi and Kekaya warriors were agitated by the arrows of Dronacharya in the war and just as the great volume of water of the ocean sweeps away many boats, similarly the group of arrows which were released from Dronacharya's bow and took away lives very quickly, had killed the Pandava soldiers. Then, roaring like lions and making deep noises of various types of war instruments, they began to block the enemy's charioteers, elephant riders and foot soldiers from all sides.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas