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mahabharat 7.22.15: जैसे द्रोण के तीखे बाणों से घायल होकर मधुमक्खियाँ युद्धभूमि से भाग रही हैं, वैसे ही वे एक दूसरे के पीछे छिपकर भाग रही हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 7.22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 22: द्रोणके युद्धके विषयमें दुर्योधन और कर्णका संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.22.15 
भ्रमरैरिव चाविष्टा द्रोणस्य निशितै: शरै:।
अन्योन्यं समलीयन्त पलायनपरायणा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जैसे द्रोण के तीखे बाणों से घायल होकर मधुमक्खियाँ युद्धभूमि से भाग रही हैं, वैसे ही वे एक दूसरे के पीछे छिपकर भाग रही हैं॥15॥
 
Like bees, wounded by Drona's sharp arrows, they are fleeing from the battlefield, taking cover behind one another.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)