हे भरतपुत्र! महामना द्रोणाचार्य के द्वारा मारे जाने पर पांचाल, केकय और मत्स्यदेश के सैनिक इन्द्र द्वारा मारे गए राक्षसों के समान काँप उठे।
O son of Bharata! The soldiers of Panchala, Kekaya and Matsyadesh trembled after being struck by the great-minded Drona, like the demons killed by Indra. 65.
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि संशप्तकवधपर्वणि द्रोणयुद्धे एकविंशोऽध्याय:॥ २१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत संशप्तकवधपर्वमें द्रोणाचार्यका युद्धविषयक इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१॥