श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.21.31 
उत्तमं ह्याददानस्य धनुरस्याशुकारिण:।
ज्याघोषो निघ्नतोऽमित्रान् दिक्षु सर्वासु शुश्रुवे॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य जब अपने उत्तम धनुष से शीघ्रतापूर्वक अस्त्र चलाते और शत्रुओं का संहार करते जा रहे थे, तब उनके धनुष की टंकार की ध्वनि सब दिशाओं में सुनाई दे रही थी ॥31॥
 
The sound of the bowstring of Dronacharya, who was swiftly shooting his weapons with a fine bow and slaying his enemies, could be heard in all directions. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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