श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.21.28 
तस्य चानदतो द्रोण: शिर: कायात् सकुण्डलम्।
क्षुरेणापाहरत् तूर्णं ततो मत्स्या: प्रदुद्रुवु:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तब द्रोणाचार्य ने गर्जना करके क्षुर नामक बाण से शतानीक का सिर कुण्डलों सहित काट डाला। यह देखकर मत्स्य देश के सैनिक भाग खड़े हुए।
 
Then Dronacharya roared and cut off the head of Satanika along with his earrings with an arrow called Kshur. Seeing this the soldiers of Matsya country ran away.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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