vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 21: द्रोणाचार्यके द्वारा सत्यजित् , शतानीक,दृढसेन,क्षेम, वसुदान तथा पांचालराजकुमार आदिका वध और पाण्डव-सेनाकी पराजय
»
श्लोक 14
श्लोक
7.21.14
वृकस्तु परमक्रुद्धो द्रोणं षष्टॺा स्तनान्तरे।
विव्याध बलवान् राजंस्तदद्भुतभिवाभवत्॥ १४॥
अनुवाद
हे नरदेव! शक्तिशाली वृक ने क्रोधित होकर द्रोणाचार्य की छाती में साठ बाण मारे। यह अद्भुत घटना थी।
O lord of men! The powerful Vrik became very angry and shot sixty arrows into Dronacharya's chest. That was an amazing thing.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas