श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 99
 
 
श्लोक  7.202.99 
व्यास उवाच
पद्मयोनिवच: श्रुत्वा तत: प्रीतो महेश्वर:।
प्रसादाभिमुखो भूत्वा अट्टहासमथाकरोत्॥ ९९॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं - पार्थ! ब्रह्माजी के वचन सुनकर भगवान महेश्वर प्रसन्न हो गए और उनका आशीर्वाद लेने के लिए तत्पर होकर जोर से हंसने लगे।
 
Vyasa says - Partha! On hearing Brahma's words Lord Maheshwara became pleased and ready to seek His blessings, he laughed out loud. 99.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)