श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 202: व्यासजीका अर्जुनसे भगवान् शिवकी महिमा बताना तथा द्रोणपर्वके पाठ और श्रवणका फल  »  श्लोक 110-111h
 
 
श्लोक  7.202.110-111h 
ईदृशश्च महादेवो भूयांश्च भगवानज:।
न हि सर्वे मया शक्या वक्तुं भगवतो गुणा:॥ ११०॥
अपि वर्षसहस्रेण सततं पाण्डुनन्दन।
 
 
अनुवाद
अर्जुन! यह अजन्मा भगवान महादेव की महान महिमा है। यदि मैं हजारों वर्षों तक निरन्तर वर्णन करता रहूँ, तो भी मैं भगवान के समस्त गुणों को पार नहीं कर सकता। 110 1/2॥
 
Arjun! This is the great glory of the unborn Lord Mahadev. Even if I keep narrating continuously for thousands of years, I cannot overcome all the qualities of God. 110 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)