श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  7.201.d1 
योऽसौ नारायणो नाम पूर्वेषामपि पूर्वज:।
(आदिदेवो जगन्नाथो लोककर्ता स्वयं प्रभु:।
आद्य: सर्वस्य लोकस्य अनादिनिधनोऽच्युत:॥
 
 
अनुवाद
भगवान नारायण, जो हमारे पूर्वजों के पूर्वज हैं, आदिदेव जगन्नाथ हैं, जगत के रचयिता हैं और स्वयं सब कुछ करने में समर्थ हैं। वे समस्त ब्रह्माण्ड के मूल कारण हैं और उनका न आदि है, न अंत। उन्हें अच्युत इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं होते।
 
Lord Narayana, who is the ancestor of our ancestors, is the Adidev, Jagannath, the creator of the world and is capable of doing everything himself. He is the root cause of the entire universe and is without beginning or end. He is called Achyuta because he never deviates from his limits.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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