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mahabharat 7.201.98: उसका शरीर रोमांच से भर गया। उसने विनम्रतापूर्वक ऋषि को प्रणाम किया और अपनी सेना की ओर देखते हुए उन्हें शिविर में लौटने का आदेश दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 98
 
 
श्लोक  7.201.98 
हृष्टरोमा च वश्यात्मा सोऽभिवाद्य महर्षये।
वरूथिनीमभिप्रेक्ष्य ह्यवहारमकारयत्॥ ९८॥
 
 
अनुवाद
उसका शरीर रोमांच से भर गया। उसने विनम्रतापूर्वक ऋषि को प्रणाम किया और अपनी सेना की ओर देखते हुए उन्हें शिविर में लौटने का आदेश दिया।
 
His body was filled with thrill. He humbly bowed to the sage and looking at his army ordered them to return to the camp.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)