श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  7.201.97 
संजय उवाच
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा द्रोणपुत्रो महारथ:।
नमश्चकार रुद्राय बहु मेने च केशवम्॥ ९७॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! व्यास जी के ये वचन सुनकर द्रोणपुत्र महारथी अश्वत्थामा ने मन ही मन भगवान शंकर को प्रणाम किया और भगवान श्रीकृष्ण की महानता को भी स्वीकार किया।
 
Sanjaya says - O King! On hearing these words of Vyasa, the great warrior Ashvatthama, son of Drona, mentally bowed down to Lord Shankar and also accepted the greatness of Lord Krishna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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