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mahabharat 7.201.96: जो मनुष्य समस्त प्राणियों का मूलस्थान जानकर भगवान शिव के लिंग की पूजा करता है, भगवान शिव उसे बहुत प्रिय हैं ॥96॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  7.201.96 
सर्वभूतभवं ज्ञात्वा लिङ्गमर्चति य: प्रभो:।
तस्मिन्नभ्यधिकां प्रीतिं करोति वृषभध्वज:॥ ९६॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य समस्त प्राणियों का मूलस्थान जानकर भगवान शिव के लिंग की पूजा करता है, भगवान शिव उसे बहुत प्रिय हैं ॥96॥
 
Lord Shiva loves the one who worships the Lingam of Lord Shiva knowing it to be the place of origin of all creatures. ॥ 96॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)