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श्लोक 7.201.96  |
सर्वभूतभवं ज्ञात्वा लिङ्गमर्चति य: प्रभो:।
तस्मिन्नभ्यधिकां प्रीतिं करोति वृषभध्वज:॥ ९६॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य समस्त प्राणियों का मूलस्थान जानकर भगवान शिव के लिंग की पूजा करता है, भगवान शिव उसे बहुत प्रिय हैं ॥96॥ |
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| Lord Shiva loves the one who worships the Lingam of Lord Shiva knowing it to be the place of origin of all creatures. ॥ 96॥ |
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