श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  7.201.95 
स एष रुद्रभक्तश्च केशवो रुद्रसम्भव:।
कृष्ण एव हि यष्टव्यो यज्ञैश्चैव सनातन:॥ ९५॥
 
 
अनुवाद
ये श्रीकृष्ण भगवान शंकर के भक्त हैं और उन्हीं से प्रकट हुए हैं; अतः यज्ञों द्वारा सनातन पुरुष श्रीकृष्ण की ही पूजा करनी चाहिए ॥95॥
 
This Shri Krishna is a devotee of Lord Shankar and has appeared from him; Therefore, only the eternal man Shri Krishna should be worshiped through yagyas. 95॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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