Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.201.92: इस प्रकार आपके और नर-नारायण के जन्म, कर्म, तप और योग ही पर्याप्त हैं। नर-नारायण ने महादेवजी की पूजा शिवलिंग के रूप में की है और आपने हर युग में मूर्ति के रूप में उनकी पूजा की है। | mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जन्मकर्मतपोयोगास्तयोस्तव च पुष्कला:।
ताभ्यां लिङ्गेऽर्चितो देवस्त्वयार्चायां युगे युगे॥ ९२॥
अनुवाद
इस प्रकार आपके और नर-नारायण के जन्म, कर्म, तप और योग ही पर्याप्त हैं। नर-नारायण ने महादेवजी की पूजा शिवलिंग के रूप में की है और आपने हर युग में मूर्ति के रूप में उनकी पूजा की है।
In this way, your and Nara-Narayana's births, deeds, penance and yoga are sufficient. Nara-Narayana have worshipped Mahadevji in the form of Shivling and you have worshipped him in the form of idol in every era.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥