श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  7.201.91 
स तथा पूज्यमानस्ते पूर्वदेहेऽप्यतूतुषत्।
पुष्कलांश्च वरान् प्रादात् तव विद्वन् हृदि स्थितान्॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
विद्वान्! पूर्वजन्म में इस प्रकार से पूजित होने पर भगवान शंकर अत्यंत प्रसन्न हुए थे और उन्होंने तुम्हें अनेक मनोवांछित वर प्रदान किए थे॥ 91॥
 
Scholar! Being worshipped by you in this manner in your previous life, Lord Shankar was very pleased and he granted you many desired boons.॥ 91॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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