श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  7.201.87 
तावेतौ पूर्वदेवानां परमोपचितावृषी।
लोकयात्राविधानार्थं संजायेते युगे युगे॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
ये दोनों ऋषि ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र नामक प्रमुख देवताओं में विष्णु के अवतार हैं और तपस्या में बहुत आगे बढ़ चुके हैं। ये प्रत्येक युग में लोगों को धर्म की मर्यादा में रखकर उनकी रक्षा करने के लिए अवतार लेते हैं। 87॥
 
These two sages are incarnations of Vishnu among the main deities, Brahma, Vishnu and Rudra and have progressed greatly in penance. They take incarnation in every age to protect the people by keeping them within the limits of religion. 87॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas