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mahabharat 7.201.86: नारायण की तपस्या से ही महामुनि नर प्रकट हुए हैं, जो इन भगवान के समान ही शक्तिशाली हैं। तुम अर्जुन को सदैव उन्हीं भगवान नरक का अवतार ही समझो ॥86॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  7.201.86 
तस्यैव तपसा जातं नरं नाम महामुनिम्।
तुल्यमेतेन देवेन तं जानीह्यर्जुनं सदा॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
नारायण की तपस्या से ही महामुनि नर प्रकट हुए हैं, जो इन भगवान के समान ही शक्तिशाली हैं। तुम अर्जुन को सदैव उन्हीं भगवान नरक का अवतार ही समझो ॥86॥
 
It is through the penance of Narayana that Mahamuni Nara has appeared, who is as powerful as this Lord. You always consider Arjun as the incarnation of the same Lord Naraka. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)