श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  7.201.79 
व्यास उवाच
तस्मै वरानचिन्त्यात्मा नीलकण्ठ: पिनाकधृत्।
अर्हते देवमुख्याय प्रायच्छदृषिसंस्तुत:॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
व्यासजी कहते हैं- द्रोणकुमार! इस प्रकार नारायण ऋषि की स्तुति करने पर भगवान शिव ने अपने अचिन्त्य रूप से, पिनाक धारण करने वाले, नील कण्ठ वाले, उन वर पाने के सबसे अधिक योग्य देवता नारायण को बहुत से वर दिए॥79॥
 
Vyasji says- Dronakumar! On praising Narayan Rishi in this way, Lord Shiva, in his unimaginable form, wearing a pinak, having a blue voice, gave many boons to that deity Narayan, who was most deserving of getting boons. 79॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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