श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  7.201.72 
श्रीनारायण उवाच
त्वत्सम्भूता भूतकृतो वरेण्य
गोप्तारोऽस्य भुवनस्यादिदेव।
आविश्येमां धरणीं येऽभ्यरक्षन्
पुरा पुराणीं तव देवसृष्टिम्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
श्री नारायण बोले - आदिदेवों में श्रेष्ठ! जिन्होंने इस पृथ्वी पर आकर आपकी प्राचीन दिव्य सृष्टि की रक्षा की थी तथा जो इस ब्रह्माण्ड की भी रक्षा करने वाले हैं, वे प्रजापति जिन्होंने समस्त जीवों की रचना की है, वे भी आपसे ही उत्पन्न हुए हैं।
 
Shri Narayan said - The best of the Adidevas! Those who had entered this earth and protected your ancient divine creation and those who are going to protect this universe as well, those Prajapatis who have created all living beings have also been born from you. 72.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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