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श्लोक 7.201.69  |
अक्षमालापरिक्षिप्तं ज्योतिषां परमं निधिम्।
ततो नारायणो दृष्ट्वा ववन्दे विश्वसम्भवम्॥ ६९॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान नारायण ने जगत् के रचयिता भगवान् की पूजा की, जो रुद्राक्ष की माला से सुशोभित थे और महिमा के परम स्रोत थे ॥69॥ |
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| Lord Narayana worshiped the Creator of the Universe, who was adorned with the Rudraksha rosary and was the supreme source of glory. 69॥ |
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