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mahabharat 7.201.64: उसे कहीं कोई रोक नहीं सकता, उसका दर्शन करना बड़ा कठिन है, वह दुष्टों पर बड़ा क्रोध करने वाला है, उसका हृदय विशाल है, वह सबका दुःख दूर कर देता है अथवा सबका नाश कर देता है, उसका हृदय संतों के प्रति बड़ा उदार है, वह दिव्य धनुष और दो तरकश धारण करता है, उसका कवच सोने का बना है और वह अनन्त बल और पराक्रम से युक्त है॥ 64॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  7.201.64 
दुर्वारणं दुर्दृशं तिग्ममन्युं
महात्मानं सर्वहरं प्रचेतसम्।
दिव्यं चापमिषुधी चाददानं
हिरण्यवर्माणमनन्तवीर्यम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
उसे कहीं कोई रोक नहीं सकता, उसका दर्शन करना बड़ा कठिन है, वह दुष्टों पर बड़ा क्रोध करने वाला है, उसका हृदय विशाल है, वह सबका दुःख दूर कर देता है अथवा सबका नाश कर देता है, उसका हृदय संतों के प्रति बड़ा उदार है, वह दिव्य धनुष और दो तरकश धारण करता है, उसका कवच सोने का बना है और वह अनन्त बल और पराक्रम से युक्त है॥ 64॥
 
No one can stop him anywhere, it is very difficult to see him, he is very angry with the wicked, he has a large heart, he removes all sufferings or destroys all, his heart is very generous towards the saints, he carries a divine bow and two quivers, his armour is made of gold and he is endowed with infinite strength and valour.॥ 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)