श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.201.58 
स तपस्तीव्रमातस्थे शिशिरं गिरिमास्थित:।
ऊर्ध्वबाहुर्महातेजा ज्वलनादित्यसंनिभ:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी भगवान नारायण ने हिमालय पर्वत पर दोनों भुजाएँ ऊपर उठाकर कठोर तप किया ॥58॥
 
Lord Narayana, who is as radiant as the fire and the sun, performed severe penance while staying on the Himalaya mountain with both His arms raised up. ॥ 58॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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