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श्लोक 7.201.57  |
| अजायत च कार्यार्थं पुत्रो धर्मस्य विश्वकृत्॥ ५७॥ |
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| अनुवाद |
| उन जगत् रचयिता भगवान् ने एक बार किसी विशेष प्रयोजन से धर्मपुत्र के रूप में अवतार लिया था ॥57॥ |
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| That world creator God had once incarnated in the form of the son of Dharma for some special purpose. 57॥ |
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