श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 57
 
 
श्लोक  7.201.57 
अजायत च कार्यार्थं पुत्रो धर्मस्य विश्वकृत्॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
उन जगत् रचयिता भगवान् ने एक बार किसी विशेष प्रयोजन से धर्मपुत्र के रूप में अवतार लिया था ॥57॥
 
That world creator God had once incarnated in the form of the son of Dharma for some special purpose. 57॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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