श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.201.55 
एतत् प्रब्रूहि भगवन् मया पृष्टो यथातथम्।
श्रोतुमिच्छामि तत्त्वेन सर्वमेतन्महामुने॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे मुनि! मैंने आपसे जो प्रश्न पूछा है, उसका यथार्थ उत्तर दीजिए। मैं यह सब विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ।॥ 55॥
 
‘Lord! O great sage! Please give me the true answer to the question I have asked you. I want to hear all this in detail.’॥ 55॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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